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10/01/2016

सूअर की मौत

कीचड़ में सने, मल में लिपटे
उसके छोटे और गदराये शरीर को आरी की तरह रौंदती गाड़िया
एक के बाद एक, दनादन
मानो रोड पर किसी ने सत्तर किलो का नॉन-वेज केक रख दिया हो

जितनी गाड़ियों की भीड़, उतनी ही ज़्यादा नौटंकी
साइड से गाडी निकालने  की जगह नहीं तो लोगों ने उस सूअर को केक समझ कर काटना शुरू किया
शायद किसी ने गाना भी गाया होगा, 'हैप्पी डेथ डे टू यू, हैप्पी डेथ डे टू यू, हैप्पी डेथ डे टू यू डिअर सूअर'

मेरी भी गाडी अचानक से टकराई उस लाश से
मुझे कुछ कड़कने की आवाज़ आयी
शायद 'हड्डियां' होंगी
थोड़ा आगे जागे गाडी रोक कर देखा तो उस सूअर का रक्त-रंजीत शरीर रोड पर पड़ा सड़ रहा था
न आने वालों को उसकी फ़िक्र, न जाने वालों को

शायद सूअर की मौत मरना इसी को कहते हैं
या हमारे समाज की संवेदनहीनता को?







6/12/2016

ख्वाब हो या कोई हकीक़त

ख्वाब हो या कोई हकीक़त,
उम्मीद हो की अफसाना तुम,
कुछ पलो की बारिश हो,
या कुछ शब्दों की दुनिया तुम,
कितना समेत लू तुमको खुद में,
बहती नदिया की धारा हो तुम,
अविरल, निश्चल, चंचल प्रतिमा,
हस्ती काया में तुम सिमटी,
खुद की एक अद्भुत दुनिया हो तुम,
ख्वाब हो या कोई हकीक़त,
उम्मीद हो की अफसाना तुम...

2/02/2012

जीवन तुम रचती...

अपनों में सिमटी
ममता में लिपटी
खुद में खपती
जीवन तुम रचती

काया में ढलती
प्रेम में पिघलती
सतत तुम जलती
प्राथना में रमती
जीवन तुम रचती

मोह तुम करती
माया में फसती
निर्माण करती
वंश चलाती
जीवन तुम रचती

अपनों में सिमटी
ममता में लिपटी
खुद में खपती
जीवन तुम रचती

आशा तुम जगाती
निराशा भगाती
सृजन तुम करती
उथान करती
जीवन तुम रचती

प्रज्ञा बढाती
गौरव तुम लाती
रेगिस्तानी जड़ता मिटाती
हरियाली सजाती
जीवन तुम रचती...

जीवन तुम रचती...


1/28/2012

चाँद में भी दाग है!


अज रात चाँद से मैंने बातें की
कोशिश बहुत की उसे समझाने की
बचपन की दोस्ती का भी दिया दिलासा
पर उसे लगा मैं कर रहा था तमाशा
शिकायत उसकी थी बड़ी वाजिब
कहता मनुष्य कर रहा साजिश
उसके घर को हथियाने का
उसपे जीवन बसाने का
मैंने बोला है नहीं ये कोई साजिश
तुम्हारे वीराने ग्रह पर
मनुष्य जीवन लायेगा
सारा जग तुम्हारे गीत गायेगा
इसमें क्या है तुम्हे परेशानी?
मुझे मालूम क्या करता इन्सान अपने ग्रह के साथ
लोभ में कर देता है सब सर्वनाश
माना मनुष्य बोहोत बुरा होता है
अपने ही कर्मो में कुचला होता है
पर हे चाँद,
तुम हमको जीवन दोगे
इसमें होगी तुमारी शान
खोया सा चाँद
छिपा गया बादलो के बीच जाके
इतने शीतल चाँद को
कवियों की जान को
ये कैसे विचार आए
हमारे जैसा भय , संकुचित मन
कुछ देर रहा मैं अचंभित
एकटक निहारता रहा उसको
देखा की उसमे भी तो दाग है
उसका भी एक हिस्सा बस अंधकार है...